नमस्ते दोस्तो में भोज परमार आज अपने पुराने मित्र की उस कहानी का जिक्र करने जा रहा हूँ जिसे कई दिनों से में शेयर करना चाहता हूं।जिस कहानी ने मुझे कई सोचने को मजबूर किया है। बात तब की है जब मैं अपनी ट्रेनिंग खत्म करके भोपाल में शिफ्ट हुआ था।मुझे नव निर्मित क्वार्टर अलाट हुआ,हम जिस रोज मकान में निवास के लिए आए ठिक उसी दिन लाईन में काफी हलचल थी लोगों ने किसी के स्वागत कि तैयारी कर रखी थी। मेने भी उत्सुकतावश पता किया कोई मंत्री आरहा है क्या?हर कोई व्यक्ति उसकी तारीफ के पुल बांध रहा था। हमारे एक पडोसी ने बताया ये जो व्यक्ति आ रहे हैं, अभी अभी नायब तहसीलदार बने हैं। इससे पहले इसी लाइन में पानी सप्लाई करने की नौकरी करते थे। बहुत परिश्रम के बाद इतने ऊंचे पद पर पहूचे हैं। यहां से अब सम्मान पूर्वक विदाई दी जा रही है। सभी लोगों ने नायब तहसीलदार साहब को मालाएँ पहनाई उपहार दिए। मुझे भी किसी ने एक माला दि मैं भी माला पहना दी। मुझे उस व्यक्ति के बारे में सुनकर बड़ी उत्सुकता हुई उनका नंबर लिया और मिलने कि इच्छा जाहिर की ताकि उनकी सफलता की कहानी आप लोगों तक पहुंचा सकु। क ई बार वे लाईन में आते...